टेलीफोन लिंक (Telephone links)

टेलीफोन लिंक 

आजकल टेलीफोन लिंक का उपयोग आम बात हो गई है। टेलीफोन की सहायता से विश्व के किसी एक कोने से दूसरे कोने तक बातचीत की जा सकती है।

टेलीफोन लिंक के लिए भू-तरंगें , आकाशीय तरंगें , माइक्रो तरंगें , समाक्षीय केबल , प्रकाश तन्तु केबल आदि का उपयोग किया जाता है।

प्रश उठता है कि एक केबल एक ही समय में कई टेलीफोन कालों (calls) को एक साथ बिना व्यतिकरण के कैसे ले जाता है ?

वास्तव में टेलीफोन सिगनलों को उसी रूप में सीधे नहीं भेजा जाता है अपितु प्रत्येक सिग्नल को एक निश्चित वाहक आवृत्ति के साथ मॉडुलित किया जाता है।

मॉडुलित सिग्नल अभिग्राही पर विमॉडुलित हो जाते हैं।

मल्टीप्लेक्सिंग ( Multiplexing ) :-

कई सिगनलों को एक साथ किसी चैनल द्वारा प्रेषित करने की क्रिया को मल्टीप्लेक्सिंग कहते हैं।

यह क्रिया दो प्रकार से की जा सकती है –

1.आवृत्ति विभाजन मल्टीप्लेक्सिंग :-

इसके अंतर्गत संदेश सिगनल का एनालॉग मॉडुलन किया जाता है।

2. समय विभाजन मल्टीप्लेक्सिंग :-

इसके अंतर्गत संदेश सिग्नल का स्पंद मॉडुलन किया जाता है।

साधारण टेलीफोन लिंक में ऐंठित युग्म तार लाइन की बैण्ड चौड़ाई 2 MHz तथा समाक्षीय केबल की बैण्ड चौड़ाई 20 MHz होती है।

इसके आगे बैण्ड चौड़ाई को और अधिक बढ़ाने के लिए निम्न का उपयोग करते हैं –

(a). सूक्ष्म तरंग लिंक

(b). संचार उपग्रह लिंक।

(a). सूक्ष्म तरंग लिंक (Microwave Link ) :-

सूक्ष्म तरंग लिंक सूक्ष्म तरंगों का उपयोग वाहक तरंगों के रूप में किया जाता है।

इस लिंक में प्रेषित्र और अभिग्राही ऊँचे टावर पर लगे हैं तथा एक ही दृष्टि रेखा (Line of sight) में होते हैं।

सूक्ष्म तरंग संचरण का परास लगभग 50 किमी होता है , क्योंकि सूक्ष्म तरंगें अपने पथ में आने वाले अवरोधों

जैसे पर्वत , इमारतों की शिखर पृथ्वी की वक्राकार सतहें आदि पर मुड़ नहीं पाती है।

इसे अतिरिक्त ये तरंगें कई कारणों से दुर्बल होती जाती हैं।

अतः हर 25-30 किमी के अन्तराल में रिपीटर (Repeaters) लगाने की आवश्यकता होती है।

(b). संचार उपग्रह लिंक (Communication Satellite Link ):-

संचार उपग्रह लिंक में सूक्ष्म तरंग लिंक की खामियां दूर कर दी गई हैं।

संचार उपग्रह एक सूक्ष्म तरंग रिले स्टेशन होता है जिसे भू-स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाता है।

पृथ्वी तल से इसकी ऊँचाई लगभग 36000 किमी होती हैं।

प्रेषित्र से सिग्नल संचार उपग्रह की ओर भेजे जाते हैं।

संचार उपग्रह में लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इन सिगनलों को प्रवर्धित करते हैं।

तत्पश्चात् इन सिगनलों को वांछित स्टेशन के अभिग्राही की ओर भेज दिया जाता है।

संचार तंत्र किसे कहते हैं ?

एनालॉग तथा डिजिटल संचार किसे कहते हैं ?

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विमॉडुलन(Demodulation ) किसे कहते हैं ?

मॉडुलन (Modulation ) किसे कहते हैं?

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Author: educationallof

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