Ulcer meaning in hindi

Ulcer meaning in hindi – ULCER को हिंदी में ‘अल्सर’ कहा जाता है।

यह शरीर में होने वाले छाले या घाव हैं।

यह ऐसा घाव हैं जिसके होने से व्यक्ति की नींद चैन सब उड़ जाती हैं।

अल्सर का कारण –

तेज रफ्तार जिन्दगी की बेतहाशा भाग-दौड़ और काम के बढ़ते बोझ ने आदमी को मशीन के माफिक बना दिया है।

व्यस्तता के कारण अपने लिए समय निकाल पाना तो मुश्किल है ही,

साथ ही आदमी अपने खाने-पीने का भी पूरा ध्यान नहीं दे पाता।

तनावग्रस्त जिन्दगी आदमी के शरीर का सर्वाधिक दोहन कर रही है और इसका बुरा प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है।

ऐसे में अनेक रोगों को पनाह मिलने का मौका मिल जाता है।

तनाव के कारण –

खाने-पीने में असंतुलित और अत्यधिक तनाव के कारण खास तौर से पेट की तमाम बीमारियों के होने का खतरा बना रहता है।

पेट की बीमारियों में आजकल अल्सर अथवा फोड़ा या व्रण एक आम रोग बनता जा रहा है।

इस बीमारी के शुरूआती लक्षण कई प्रकार के हो सकते हैं,

जैसे पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द उठना, पेट भरा-भरा लगना, भूख कम लगना, छाती में तेज जलन होना और उल्टी होना।

खाना ठीक से नहीं पचने के कारण रोगी को छाती में जलन की शिकायत रहने लगती है।

अक्सर देखा गया है कि रोगी यह समझने लगता है कि उसे कोई गंभीर बीमारी लग गई है।

यहां तक रोगी अल्सर के कारण सीने में होने वाली जलन को दिल की बीमारी होने का भय भी अपने मन में पालने लग जाता है।

इसके लिए रोगी को भी दोषी नहीं माना जा सकता,

क्योंकि कई बार डाक्टर भी बीमारी की पहचान करने में चूक जाते हैं।

जहां तक सीने की जलन का प्रश्न है सच्चाई यह है कि पेट की नली में होने वाली गड़बड़ी इसका कारण होती है।

सीने में जलन की शिकायत –

सीने में जलन की शिकायत कई कारणों से होती है जैसे कि बहुत ज्यादा तेल, घी और मिर्च मसाले वाला भोजन खा लेना,

शराब का अधिक मात्रा में सेवन करना, खट्टे फलों का रस लेना या एस्पिरिन आदि दवाइयों का ज्यादा इस्तेमाल करना।

बार-बार और ज्यादा देर तक सीने में जलन होना।

अल्सर जैसी जानलेवा बीमारी का एक खतरनाक संकेत होता है।

बीमारी के लक्षणों –

अगर सामान्य भाषा में इस बीमारी के लक्षणों और कारणों की व्याख्या की जाए

तो इसकी मुख्य वजह पेट अथवा आंत में जख्म होना होता है।

निरन्तर अत्यधिक तेल, घी और मिर्च मसाले वाला खाना खाने के कारण पेट की पाचन प्रक्रिया गड़बड़ाने लगती है।

ठीक से भोजन नहीं पच पाने के कारण कब्ज और गैस की शिकायत होने लगती है।

आगे चलकर यही अल्सर का एक कारण बन जाते हैं।

पेट और आंत की भीतरी कोशिकायें कमजोर पड़ने लगती हैं

और धीरे-धीर यह जख्म का रूप धारण करने लगती है।

इसके बाद पेट में दर्द असहनीय होने लगती हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अध्ययन से यह बात साबित हो चुकी है कि अत्यधिक कि तनाव के कारण भी पेट की बीमारियां जन्म लेती हैं।

खासतौर पर पढ़ने-लिखने या व्यापार के घाटे के कारण किसी व्यक्ति का तनावग्रस्त हो जाना स्वाभाविक है।

लेकिन जो कमजोर होते हैं अथवा अपनी समस्याओं के प्रति तार्किक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाते हैं,

वे मन में तनाव पालने लग जाते हैं और ज्यादा दिनों तक तनाव की जिन्दगी जीने के कारण उनकी सामान्य दिनचर्या गड़बड़ा जाती है।

पहला असर –

इसका पहला असर व्यक्ति की पाचन प्रक्रिया पर पड़ता है

और वह पेट के रोग का इलाज कराने के साथ-साथ मनोचिकित्सकों से परामर्श करना चाहिए,

ताकि तनाव के कारण जन्मी पेट की बीमारियों को जड़-मूल से समाप्त किया जा सके।

अल्सर के रोगी को पेट दर्द की शिकायत रहती है।

कई बार देखा गया है कि अल्सर का रोगी अगर कुछ खा लेता है तो कुछ देर के लिए उसका दर्द कम हो जाता है

लेकिन कई बार कुछ खाने के दो-तीन घंटे बाद अथवा शराब पीने या तला हुआ भोजन खाने के बाद पेट में भयंकर दर्द उठता है।

कई बार रात में सोते समय जोर का दर्द उठता है और रोगी छटपटाने लगता है।

किसी-किसी को खून की उल्टी तक होती है और किसी के मल के साथ काले रंग का खून आता है।

अल्सर का इलाज –

अल्सर का समय पर इलाज होना नितांत आवश्यक है।

अगर इसमें देरी हो जाए तो आदमी की जान के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

इस बीमारी से बचने और उसके इलाज के लिए सबसे अधिक ध्यान देने योग्य बात यह है

कि आदमी नियम से और समय पर अपना भोजन करे यानि उसका पेट कभी भी तीन घंटे से अधिक समय खाली नहीं रहे।

ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाए जिनसे आराम मिले।

पेट में जलन अथवा अपच होने तथा अल्सर के निदान के लिए दूध 1 सबसे उत्तम दवाई है।

अगर अल्सर बहुत बढ़ गये हों तो रोगी को कुछ दिन तक हर घंटे पर दूध पीना चाहिए और इसके साथ ही पनीर, क्रीम

और पके हुए केले का सेवन करना चाहिए।

कुछ दिन बाद जब दर्द कम होने लगे तो अंडे को उबालकर या उसका पोच बनाकर, प्लेन नूडले का सूप, उबले हुए आलू और शर्बत भी लिया जा सकता है।

कुछ महीने के बाद खाने के साथ तथा सुबह दोपहर और रात को सोने से पहले यानि दिन में करीब पांच-छः बार दूध अवश्य पीना चाहिए।

पेट में भयंकर दर्द की हालत में डाइजिन जैल पीनी चाहिए।

इससे काफी राहत महसूस होती है।

अल्सर ठीक हो जाने पर भी उस व्यक्ति को ऐसी किसी वस्तु का सेवन नहीं करना चाहिए जो उसके लिए नुकसान दायक साबित हो चुकी हो।

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