स्पर्शज्या का नियम , इस नियमानुसार , यदि स्वतंत्रतापूर्वक घूमने वाले चुम्बक पर दो एकसमान और लम्बवत् चुम्बकीय क्षेत्र क्रियाशील हों और
सन्तुलन की स्थिति में चुम्बक पहले क्षेत्र H से θ कोण बनाता हो , तो दूसरा क्षेत्र B पहले क्षेत्र H का tan θ गुना होता है अर्थात्
B = H tanθ
स्पर्शज्या नियम का शर्त :-
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स्पर्शज्या नियम तभी लागू होता है जबकि निम्नलिखित शर्तें पूरी हों –
1. दोनों चुम्बकीय क्षेत्र एकसमान हों ,
2.दोनों क्षेत्र परस्पर लम्बवत् हों तथा
3. दोनों क्षेत्र समतलीय हों।
सूत्र की व्युत्पत्ति :-
माना एक चुम्बक NS , जिसकी प्रभावकारी लम्बाई 2l तथा ध्रुव प्राबल्य m है , दो एकसमान व लम्बवत् चुम्बकीय क्षेत्रों H व B में स्वतंत्रतापूर्वक घूम सकता है।
मानलो संतुलनावस्था में वह पहले क्षेत्र H के साथ कोण θ बनाता है। क्षेत्र H के कारण चुम्बक पर कार्य करने वाला बलयुग्म (mH , mH) उसे H के समान्तर लाने का प्रयास करता है ,
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जबकि B के कारण कार्य करने वाला बलयुग्म (mH , mH) उसे B के समान्तर लाने का प्रयास करता है।
बल आघूर्ण , मानलो NS एक दण्ड चुम्बक है , जिसकी प्रभावी लम्बाई 2l तथा ध्रुव प्राबल्य m है। यह B तीव्रता के एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र के साथ θ कोण बनाते हुए रखा गया है। इसके प्रत्येक ध्रुव पर mB बल कार्य करेगा।
ये बल परिमाण में बराबर तथा विपरीत दिशा में होने के कारण बलयुग्म का निर्माण करेंगे। यह बलयुग्म चुम्बक को क्षेत्र के समान्तर लाने का प्रयास करता है। इसे प्रत्यानयन बलयुग्म (Restoring Couple) कहते हैं।
संतुलनावस्था में ,
(mH , mH) बलयुग्म का आघूर्ण = (mB , mB) बलयुग्म का आघूर्ण
mH × SP = mB ×NP
B = mH/m × SP / NP
B = H × SP / NP …….(1)
परन्तु समकोण ∆NPS में ,
tanθ = SP / NP
समीकरण (1) में मान रखने पर ,
B = H tan θ
यही स्पर्शज्या नियम है।
एकल स्लिट द्वारा प्रकाश का विवर्तन :-
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता :-
दण्ड चुम्बक पर बल आघूर्ण :-