चुम्बकत्व किसे कहते हैं

चुम्बकत्व किसे कहते हैं

चुम्बकत्व किसे कहते हैं

प्राचीन काल में थेल्स ऑफ मिलेटस (Thales of Miletus ) भलीभाँति जानते थे कि प्रकृति में पाये जाने वाले लोहे का एक अयस्क मेग्नेटाइट (Magnetite) या काला आयरन ऑक्साइड (Fe2O4) लोहे के छोटे छोटे टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करता था।

वे यह भी जानते थे कि जब लोहे का कोई टुकड़ा इस अयस्क के सम्पर्क में आता था ,तो उसमें भी वही गुण उत्पन्न हो जाता था।

चुम्बकत्व अर्थात मेग्नेटिज्म (Magnetism) की व्युत्पत्ति एशिया माइनर के स्थान मैग्नेशिया (Magnesia) से हुई हैं , जहाँ यह अयस्क बहुतायत में पाया जाता था।

बाद में चीनवासियों (Chinese) ने यह पता लगाया कि जब इस अयस्क को , जिसे वे लोड स्टोन (Lode stone) कहते थे , स्वतंत्रतापूर्वक लटकाया जाता था , तो वह सदैव उत्तर दक्षिण दिशा में ही ठहरता था।

वास्तव में लोड स्टोन का तात्पर्य है – अग्रग पत्थर (Leading stone) ,जो उसके दिशात्मक गुण को प्रदर्शित करता है।

यात्री दिशा ज्ञात करने के लिए इस पत्थर का उपयोग किया करते थे।

जो पदार्थ लोहे के टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करता है तथा स्वतंत्रतापूर्वक लटकाये जाने पर सदैव उत्तर दक्षिण में ठहरता है , उसे चुम्बक कहते हैं।

आगे चलकर प्रयोगों द्वारा यह ज्ञात हुआ कि लोहा , इस्पात , निकल , कोबाल्ट इत्यादि से बनी वस्तुओं को चुम्बक अपनी ओर आकर्षित करता है।

इन वस्तुओं को चुम्बकीय पदार्थ कहते हैं।

अतः जो पदार्थ चुम्बकीय वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है , उसे चुम्बक कहते हैं तथा चुम्बक के इस गुण को चुम्बकत्व कहते हैं।

चुम्बकीय ध्रुव (Magnetic poles )

यदि किसी चुम्बक को लोहे की छीलन में डालकर बाहर निकालें तो यह पाया जाता है कि उसके दोनों सिरों के पास लोहे के कण अत्यधिक मात्रा में चिपके हुए होते हैं अर्थात किनारे पर उसका चुम्बकत्व सर्वाधिक होता है।

किसी चुम्बक के सिरों के निकट स्थित जिन बिन्दुओं पर उसका चुम्बकत्व सर्वाधिक होता है , उन्हें चुम्बकीय ध्रुव कहते हैं।

चुम्बकीय ध्रुव के प्रकार –

प्रत्येक चुम्बक के दो ध्रुव होते हैं –

उत्तरी ध्रुव (North Pole) और दक्षिणी ध्रुव(South pole) ।

चुम्बक को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर जो ध्रुव उत्तर की ओर रहता है , उसे उत्तरी ध्रुव तथा जो दक्षिण की ओर रहता है , उसे दक्षिणी ध्रुव कहते हैं।

किसी भी चुम्बक के दोनों ध्रुवों को पृथक् करना असंभव है।

चुम्बक के प्रकार –

चुम्बक दो प्रकार के होते हैं –

(1) प्राकृतिक चुम्बक

(2) कृत्रिम चुम्बक।

(1) प्राकृतिक चुम्बक (Natural Magnet) –

प्रकृति से प्राप्त चुम्बक को प्राकृतिक चुम्बक कहते हैं। ये बेडौल तथा कम शक्तिशाली होते हैं। इन्हें इच्छानुसार आकृति नहीं दी जा सकती।

(2) कृत्रिम चुम्बक (Artificial Magnet) –

मानव द्वारा निर्मित चुम्बक को कृत्रिम चुम्बक कहते हैं। इन्हें इच्छित आकार का तथा अधिक शक्तिशाली बनाया जा सकता है।

विभिन्न आकृति के कृत्रिम चुम्बक प्रदर्शित किये गये हैं।

विभिन्न प्रकार के चुम्बक

कृत्रिम चुम्बक के प्रकार –

कृत्रिम चुम्बक दो प्रकार के होते हैं –

(I) अस्थायी चुम्बक

(II) स्थायी चुम्बक।

(I) अस्थायी चुम्बक (Temporary Magnet) –

उस चुम्बक को अस्थायी चुम्बक कहते हैं जिसका चुम्बकत्व स्थायी नहीं होता। अस्थायी मुलायम लोहे के बनाये जाते हैं। अस्थायी चुम्बक का चुम्बकत्व शीघ्र नष्ट किया जा सकता है।

(II) स्थायी चुम्बक (Permanent Magnet) –

उस चुम्बक को स्थायी चुम्बक कहते हैं जिसका चुम्बकत्व स्थायी होता है।

स्थायी चुम्बक कठोर स्टील , निकल , कोबाल्ट आदि का बनाया जाता है। स्थायी चुम्बक का चुम्बकत्व शीघ्र नष्ट नहीं होता।

चुम्बक के गुण (Properties of a Magnet) –

चुम्बक में मुख्यतः निम्न गुण होते हैं –

1. चुम्बक चुम्बकीय पदार्थों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

2. स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर चुम्बक सदैव उत्तर दक्षिण दिशा में ही ठहरता है।

3. सजातीय ध्रुवों में प्रतिकर्षण तथा विजातीय ध्रुवों में आकर्षण होता है।

4. चुम्बक के दोनों ध्रुवों को अलग अलग असम्भव हैं।

5. चुम्बक प्रेरण द्वारा चुम्बकीय पदार्थों में चुम्बकत्व उत्पन्न कर देता है।

6. चुम्बक को गर्म करने पर , पीटने पर , पटकने पर या घिसने पर उसका चुम्बकत्व नष्ट हो जाता है।

चुम्बकीय प्रेरण (Magnetic Induction) –

यदि किसी चुम्बकीय पदार्थ के पास एक चुम्बक लायें तो चुम्बकीय पदार्थ के उस सिरे पर , जो चुम्बक के किसी ध्रुव के नजदीक होता है , विपरीत प्रकार का ध्रुव तथा दूसरे सिरे पर उसी प्रकार का ध्रुव बन जाता है।

इस क्रिया को चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।

अतः चुम्बक की उपस्थिति मात्र से किसी चुम्बकीय पदार्थ में चुम्बकत्व उत्पन्न होने की क्रिया को चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।

ध्रुव प्राबल्य (Pole strength) –

किसी चुम्बकीय ध्रुव द्वारा चुम्बकीय पदार्थों को अपनी ओर आकर्षित करने की शक्ति को उसका ध्रुव प्राबल्य कहते हैं। इसे m से प्रदर्शित करते हैं।

इसका SI मात्रक ऐम्पियर मीटिंग या न्यूटन प्रति टेसला हैं। यह एक अदिश राशि है।

किसी चुम्बक का ध्रुव प्राबल्य उसके पदार्थ की प्रकृति तथा अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है , लम्बाई पर नहीं।

चुम्बकीय अक्ष (Magnetic Axis) –

चुम्बक के दोनों ध्रुवों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को चुम्बकीय अक्ष कहते हैं।

चुम्बकीय अक्ष

 प्रभावी लम्बाई (Effective Length of a Magnet) –

चुम्बक के दोंनो ध्रुवों के बीच की दूरी को उसकी प्रभावी लम्बाई कहते हैं। इसे 2l से प्रदर्शित करते हैं।

चुम्बकीय याम्योत्तर (Magnetic Meridian ) –

यदि चुम्बक स्वतत्रंता पूर्वक लटक रहा हो , तो चुम्बकीय अक्ष से गुजरने वाले ऊर्ध्वाधर तल को चुम्बकीय याम्योत्तर कहते हैं।

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उदासीन रेखा (Neutral Line) –

चुम्बक के केंद्र से उसकी लम्बाई के लम्बवत् काल्पनिक रेखा को उदासीन रेखा कहते हैं।

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Author: educationallof

37 thoughts on “चुम्बकत्व किसे कहते हैं

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