लघु विधि :-
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लघु विधि –
जब पदों की संख्या कम हो और अंक छोटे हो , तो उपरोक्त विधि से समान्तर माध्य का परिकलन करना बहुत सरल होता है।
परंतु समानांतर माध्य की संगणना करने की इस विधि में बहुत गणनाएं करनी पड़ती है। संख्याएं इससें भी बहुत अधिक हो सकती है और उस समय माध्य की संगणना करना बहुत कठिन हो जाता है।
इस कठिनाई से बचने के लिए लघु विधि का प्रयोग किया जाता है। इस विधि में स्वेच्छा से किसी भी संख्या को माध्य मान लेते हैं जिसको कल्पित माध्य कहते है और अस्थायी माध्य से विचारों के विचलनों को ज्ञात किया जाता है। तब –
(1). असमूहित आंकड़ों की दशा में
x = a + (∑d) / n
जबकि , a= अस्थायी माध्य (कल्पित माध्य)
d=a (कल्पित माध्य) से किसी भी विचर का विचलन, d= x-a
n = पदों की संख्या।
(2). समूहित आंकड़ो की दशा में
x = ∑(fd)/∑f
जबकि , a= अस्थायी माध्य (कल्पित माध्य)
d=a से किसी भी विचर का विचलन, अर्थात x-a
f= विचर की संगत बारम्बारता
fd=बारम्बारता और संगत विचलनों का गुणनफल।
लघु विधि से समान्तर माध्य गणना प्रक्रम के पद :-
1. किसी भी संख्या को कल्पित माध्य मान लिजिए कि कोई भी संख्या कल्पित माध्य का कार्य दे सकती है। परंतु सदैव उस संख्या को कल्पित माध्य मानना अच्छा रहता है जो या तो बीच में स्थित हो या जिसकी बारम्बारता सबसे अधिक हो। सीमांत मानों को कल्पित माध्य नहीं लेना चाहिए।
2. प्रत्येक विचर का कल्पित माध्य से विचलन d ज्ञात कीजिए अर्थात (x-a)=d
3. प्रत्येक वर्ग के विचलन को संगत बारम्बारताओं से गुणा किजिए, एवं इस गुणनफल का योगफल ज्ञात कीजिए। अर्थात ∑(fd)
4. इस योगफल को कुल बारम्बारता ∑f से भाग दीजिए और इस परिणाम मे कल्पित माध्य को जोड़ियें। इस प्रकार प्राप्त संख्या अभीष्ट माध्य होगी।
माध्यिका (Median) किसे कहते हैं ?