कण व तरंग में अंतर

कण व तरंग में अंतर (Difference  between Particle and Wave)

जानिए, कण व तरंग में अंतर

कण (Particle)

1. एक कण अंतरिक्ष में स्पष्ट स्थान ग्रहण करता है तथा स्थानीकृत होता है।

2. दो कणों का स्थान, अन्तरिक्ष में बिल्कुल एक समान नहीं हो सकता अर्थात् कण एक दूसरे के साथ हस्तक्षेप नहीं करते।

3. जब कई कण एक साथ किसी स्थान पर उपस्थित है तो उनकी कुल संख्या उनके योग के बराबर होती हैं। यह संख्या योग से न कम होती हैं न अधिक।

तरंग (Wave)

1. तरंग विस्थानीकृत होती हैं तथा फैली हुई होती हैं। जैसे जल में तरंग वलयो के रूप में आगे बढ़ती हैं।

2. दो या दो से अधिक तरंगें एक साथ अंतरिक् में एक ही जगह रह सकती हैं। दूसरे शब्दों में तरंगें एक दूसरे के साथ हस्तक्षेप कर सकते हैं।

3. जब कई तरंगें एक साथ किसी स्थान पर उपस्थित हो तो व्यतिकरण के परिणाम स्वरूप परिणामी तरंग बड़ी या छोटी हो सकती हैं।

व्यतिकरण अविनाशी या विनाशी हो सकता है।

संयोजकता बन्ध सिध्दांत एवं कक्षक सिद्धांत मे अंतर (Difference between Valence Bond Theory and Molecular Orbital Theory )

संयोजकता बन्ध सिद्धांत

1.बन्ध बनाने में संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉन भाग लेते है तथा आन्तरिक कक्षको के इलेक्ट्रॉन अपरिवर्तित रहते हैं।

2. आण्विक कक्षक नहीं बनते हैं।

3. बंधन में केवल अर्ध्दपूरित परमाणु ऑर्बिटल ही भाग लेते हैं।

4.परमाणु कक्षक मे इलेक्ट्रॉन एक नाभिक के प्रभाव मे रहता है। इन परमाणु कक्षको के आकार व आकृति सरल होते हैं।

5. सिग्मा या पाई बन्ध का बनना अतिव्यापन के ऊपर निर्भर करता है तथा सिग्मा और पाई अपने अर्थों में विशिष्ट होते हैं।

6.स्थायित्व केवल अतिव्यापन की मात्रा पर निर्भर करता है। अधिक अतिव्यापन से अधिक स्थायित्व प्राप्त होता है।

7. संयोजकता बन्ध सिद्धांत सभी अणुओं के चुम्बकीय व्यवहार को स्पष्ट नहीं कर पाता।

8. संयोजकता बन्ध सिद्धांत मे अयुग्मित इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति संभव नहीं है।

9. आकर, संरचना एवं बन्ध कोण, संयोजकता बन्ध सिद्धांत की सहायता से आसानी से समझाये जा सकते हैं।

अणु कक्षक सिद्धांत

1.संयोजी कोश तथा आन्तरिक कोश सभी के परमाणु कक्षक , अणु कक्षक बनाने मे भाग लेते हैं।

2. परमाणु कक्षको के रेखीय संयोग से आण्विक कक्षक बनते हैं।

3. इसमें इस प्रकार का कोई बन्धन नहीं होता।

4.आण्विक कक्षक मे इलेक्ट्रॉन दो या दो से अधिक नाभिकों के प्रभाव में रहता है क्योंकि ये बहुकेंद्रीय होते हैं तथा इनकी आकृतियाँ भी जटिल होता है।

5. आण्विक कक्षको के लिए भी सिग्मा, पाईं संकेतों का प्रयोग होता है परन्तु ये बहुत ज्यादा विशिष्ट अर्थ युक्त नहीं होते।

6.स्थायित्व का अनुमान बन्ध क्रम या आबन्ध कोटि से लगाया जाता है। स्थायित्व बन्ध क्रम के समानुपाती होता हैं।

7. अणुओं का चुम्बकीय व्यवहार अणु कक्षक सिद्धांत द्वारा आसानी से स्पष्ट किया जा सकता है।

8.अणु कक्षक सिद्धांत मे अणुओं के अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं।

9. अणु कक्षक सिद्धांत द्वारा विभिन्न आकर व बन्ध कोणों को अणु के बनने मे स्पष्ट नहीं किया जा सकता।

बन्धी एवं विपरीत बन्धी आणविक कक्षको मे अंतर (Difference Between Bonding And Antibonding Molecular Orbitals )

बन्धी आणविक कक्षक

1. ये परमाणु ऑर्बिटलो के रेखीय संयोग से समान चिन्ह वाले तरंग फलनों से बनते हैं अर्थात तरंग फलनों का योग होता है।

2. इनकी ऊर्जा संयोग करने वाले परमाणु कक्षको से कम होता है।

3. बन्धी आणविक कक्षको के कारण अणु हमेशा स्थायित्व प्राप्त करता हैं।

4. यह अन्तर नाभिकीय अक्ष के साथ सममित होता है।

5. इसमे नोडल तल नहीं होता।

विपरीत बन्धी आणविक कक्षक

1. ये परमाणु ऑर्बिटलो के विपरीत चिन्ह युक्त तरंग फलनो से बनते हैं अर्थात तरंग फलनो के अंतर से बनते हैं।

2. इनकी ऊर्जा संयोग करने वाले परमाणु कक्षको से अधिक होती है।

3. विपरीत बन्धी आणविक कक्षक अणु मे हमेशा अस्थायित्व लाते हैं।

4. यह असममितीय होता है।

5. इसमें नोडल तल होता है।

सिग्मा बंध और पाई बंध मे अंतर (Difference between Sigma Bond and Pie Bond)

सिग्मा बंध

1. ये कक्षको के अक्षीय अतिव्यापन (Axial overlapping ) से बनते हैं।
2. सिग्मा बंध का निर्माण s-s ,s-p & p-p कक्षको के अक्षीय अतिव्यापन से हो सकता है।

3. अधिक मात्रा मे अतिव्यापन होने के कारण सिग्मा बंध एक प्रबल बंध होता है।

4. सिग्मा बंध से बना आणविक कक्षक नाभिकीय अक्ष के चारो ओर सममित होता है।

5.सिग्मा बंध सापेक्ष परमाणुओं का मुक्त घूर्णन संभव होता है।

6.किसी अणु मे सिग्मा बंध अकेला या बंध के साथ पाया जा सकता हैं।

पाई बंध

1. ये कक्षको के पार्श्वीय अतिव्यापन से बनते हैं।

2.पाई बंध का निर्माण केवल p- कक्षको के पार्श्वीय अतिव्यापन से ही होता है।

3.पाई बंध के निर्माण में होने वाला पार्श्वीय अतिव्यापन मे अतिव्यापन की मात्रा कम होती हैं। अतः यह एक दूर्बल बंध होता है।

4.पाई बंध से बना आण्विक कक्षक मे इलेक्ट्रॉन घनत्व नाभिकीय अक्ष के ऊपर और नीचे अधिक होता है।

5.पाई बंध के सापेक्ष अणु के परमाणुओं का मुक्त घूर्णन संभव नहीं होता है।

6.पाई बंध हमेशा बंध के साथ ही पाया जाता है।

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Author: educationallof

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